August 16, 2026

15 अगस्त 2026: लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा संबोधन, 2047 के विकसित भारत का रोडमैप

chatgpt image jun 12, 2026, 03 49 34 pm

नई दिल्ली: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। यह लाल किले से उनका लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन था।

प्रधानमंत्री मोदी के इस भाषण में विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत, युवाओं के लिए रोजगार और AI प्रशिक्षण, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण, कृषि, तकनीक, ऊर्जा और देश की वैश्विक भूमिका जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे।

अपने संबोधन की शुरुआत प्रधानमंत्री ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने कहा कि आजादी केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के त्याग, संघर्ष और बलिदान का परिणाम है।

इस वर्ष वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् भारत की राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का प्रतीक रहा है।

प्रधानमंत्री ने देश के उन परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की जो बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में पूरा देश प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का सबसे बड़ा केंद्र विकसित भारत का लक्ष्य रहा।

उन्होंने कहा कि जब वर्ष 2047 में भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब देश को एक विकसित राष्ट्र के रूप में खड़ा करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार का सपना नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों का सामूहिक संकल्प होना चाहिए।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को इस लक्ष्य की सबसे महत्वपूर्ण नींव में से एक बताया। उनका कहना था कि भारत को दुनिया से तकनीक और संसाधन लेने के साथ-साथ अपनी क्षमता भी विकसित करनी होगी।

भारत को केवल दुनिया का बड़ा बाजार नहीं बनना है, बल्कि दुनिया के लिए उत्पादन करने वाला देश बनना है। भारत में बनने वाले उत्पादों की गुणवत्ता वैश्विक स्तर की होनी चाहिए और भारतीय कंपनियों को दुनिया के बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार होना होगा।

सप्तधारा का विजन

प्रधानमंत्री मोदी ने अगले कुछ वर्षों के लिए विकास की सात प्रमुख धाराओं पर जोर दिया। इनका उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था, तकनीक, कृषि, रक्षा और वैश्विक प्रभाव को मजबूत करना है।

पहली धारा है मैन्युफैक्चरिंग।

प्रधानमंत्री ने भारत को दुनिया का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि भारत को केवल अंतिम उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि छोटे-छोटे कंपोनेंट से लेकर पूरे उत्पाद तक की पूरी सप्लाई चेन देश में विकसित करनी होगी।

उन्होंने भारतीय उद्योगों और MSME सेक्टर से गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अपील की।

दूसरी धारा है कृषि और फूड प्रोसेसिंग।

प्रधानमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत के मसाले, फल, फूल, मिलेट्स और अन्य कृषि उत्पाद दुनिया के बाजार में भारतीय पहचान के साथ पहुंचने चाहिए।

उन्होंने फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को भी महत्वपूर्ण बताया, ताकि किसानों को केवल कच्चे माल के उत्पादक के रूप में न देखा जाए बल्कि उनकी उपज से ज्यादा मूल्य पैदा किया जा सके।

तीसरी धारा है टेक्नोलॉजी और इनोवेशन।

प्रधानमंत्री ने AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और 6G जैसे क्षेत्रों में भारत को दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल करने की बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत को केवल तकनीक का उपयोग करने वाला देश नहीं बनना है, बल्कि तकनीक बनाने वाला और दुनिया को तकनीक देने वाला देश बनना है।

1 करोड़ युवाओं को AI की ट्रेनिंग

युवाओं के लिए प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की।

उन्होंने अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में AI दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा, रोजगार और उद्योगों को बड़े स्तर पर बदलने वाला है। इसलिए भारत के युवाओं को AI की जानकारी और कौशल से लैस करना जरूरी है।

उनका लक्ष्य है कि भारत के युवा केवल AI का इस्तेमाल करने वाले न रहें, बल्कि AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करें।

मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

प्रधानमंत्री ने गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की दिशा में भी बड़ा ऐलान किया।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के परिवारों पर महंगी कोचिंग का आर्थिक दबाव पड़ता है। इसलिए ऑनलाइन माध्यम से गुणवत्तापूर्ण कोचिंग उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

इसका उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी अच्छे शिक्षकों और अध्ययन सामग्री तक पहुंच मिल सके।

खेल और 2036 ओलंपिक

प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत की क्षमता का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए अपनी दावेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने पर भी जोर दिया। 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों में खेल प्रतिभा पहचानने और उन्हें उचित प्रशिक्षण देने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की बात कही गई।

प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में भी बड़ी खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं। जरूरत सिर्फ उन्हें पहचानने और सही प्रशिक्षण देने की है।

नशा मुक्त भारत

प्रधानमंत्री ने युवाओं को नशे से दूर रखने को भी महत्वपूर्ण विषय बताया।

उन्होंने नशा मुक्त भारत के लिए 100 सप्ताह के अभियान का उल्लेख किया। इस अभियान में सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवकों, NGOs और समाज के अलग-अलग वर्गों को जोड़ने की बात कही गई।

प्रधानमंत्री ने परिवारों से भी अपील की कि वे युवाओं को नशे से बचाने के अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया।

उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत को रक्षा उपकरणों और महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

भारत को ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, साइबर सुरक्षा और हाइपरसोनिक तकनीक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करना नहीं होना चाहिए, बल्कि भविष्य में भारत को दुनिया के प्रमुख रक्षा उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल करना भी होना चाहिए।

दिमागी नक्सल पर प्रधानमंत्री का बयान

प्रधानमंत्री के भाषण का एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा नक्सलवाद को लेकर रहा।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र नक्सलवाद काफी कमजोर हुआ है और सरकार इसे पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दिमागी नक्सल शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसी विचारधारा के प्रति सावधान रहने की बात कही।

उन्होंने कहा कि केवल हथियार उठाने वाले नक्सलवाद को समाप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी विचारधारा को भी चुनौती देनी होगी जो देश के विकास और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ हिंसक सोच को बढ़ावा देती है।

इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली। विपक्ष ने प्रधानमंत्री के इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को असहमति और आलोचना को ऐसे शब्दों से नहीं जोड़ना चाहिए।

आधुनिक युद्ध और नागरिक सुरक्षा

प्रधानमंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी बात की।

उन्होंने कहा कि आज युद्ध केवल सीमा पर सैनिकों के बीच नहीं होता। आधुनिक समय में बैंकिंग सिस्टम, डेटा सेंटर, बिजली व्यवस्था, रिफाइनरी और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर भी निशाना बन सकते हैं।

इसीलिए भारत को आधुनिक सिविल डिफेंस व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।

महिला सशक्तिकरण

महिलाओं की बढ़ती भूमिका को प्रधानमंत्री ने भारत की ताकत बताया।

उन्होंने कहा कि आज भारतीय महिलाएं सेना, विमानन, विज्ञान, तकनीक, खेल और उद्योग सहित लगभग हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।

प्रधानमंत्री ने लखपति दीदी योजना का भी उल्लेख किया और कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

उन्होंने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की दिशा में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील भी की।

सेमीकंडक्टर और ऊर्जा

भारत की तकनीकी और औद्योगिक आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण को प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सेमीकंडक्टर भारत की अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

ऊर्जा के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की बात कही। इसका उद्देश्य भारत की बढ़ती औद्योगिक और आर्थिक जरूरतों के लिए पर्याप्त और स्थिर ऊर्जा उपलब्ध कराना है।

ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण और समुद्री अर्थव्यवस्था को भी विकास की नई दिशा बताया।

ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी स्टोरेज और ग्रीन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में भारत को आगे बढ़ाने की बात कही गई।

इसके साथ ही भारत की विशाल समुद्री सीमा को देखते हुए फिशरीज, समुद्री पर्यटन और ओशन टेक्नोलॉजी में भी रोजगार और आर्थिक विकास की बड़ी संभावनाएं बताई गईं।

भारत की सॉफ्ट पावर

प्रधानमंत्री ने भारत की संस्कृति और सॉफ्ट पावर को भी वैश्विक स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया।

योग, आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन के साथ-साथ फिल्म, एनीमेशन, VFX, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों को भारत की वैश्विक पहचान मजबूत करने वाला बताया गया।

प्रधानमंत्री का कहना था कि भारत के पास दुनिया को देने के लिए केवल तकनीक और उत्पाद ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की संस्कृति और ज्ञान की परंपरा भी है।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का मुख्य संदेश

15 अगस्त 2026 को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरे संबोधन को अगर तीन बड़े संदेशों में समझें तो पहला संदेश था विकसित भारत का।

भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में है।

दूसरा संदेश था आत्मनिर्भर भारत।

AI, सेमीकंडक्टर, 6G, रक्षा तकनीक, परमाणु ऊर्जा, हरित ऊर्जा और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारत को अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।

तीसरा संदेश था युवा भारत।

AI की ट्रेनिंग, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग, खेल प्रतिभा खोज और नशा मुक्त भारत जैसे अभियानों के जरिए युवाओं को भारत के भविष्य का सबसे महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखने और देश के विकास के लिए हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं होगा। इसके लिए देश के हर नागरिक, किसान, युवा, महिला, वैज्ञानिक, कारोबारी और श्रमिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।

15 अगस्त 2026 का यह संबोधन इसी संकल्प के साथ समाप्त हुआ कि भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ यानी 2047 तक एक मजबूत, आत्मनिर्भर, आधुनिक और विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया के सामने खड़ा हो।

i news ki reports

© 2026 inewsMitra · Professional App Experience